राहों का क्या है
दिशाओं को जोड़ना
परिवेशों को लांघना
एक दूसरे से फूटना
किसी और से मिल के
कुछ और हो जाना
दिशाओं को जोड़ना
परिवेशों को लांघना
एक दूसरे से फूटना
किसी और से मिल के
कुछ और हो जाना
राहों का क्या है
क्षण भर में बनना बिगड़ना
मंज़िलों के स्वप्न बुनना
रहियों को पुकारना
पुचकारना दुत्कारना
फिर किसी और से मिल के कुछ और हो जाना
क्षण भर में बनना बिगड़ना
मंज़िलों के स्वप्न बुनना
रहियों को पुकारना
पुचकारना दुत्कारना
फिर किसी और से मिल के कुछ और हो जाना
पथिक चुने एक मंज़िल कोई
और राह नहीं दिशा चुने
फिर हो दुर्गुम् दुष्कर रास्ते
पर उफ़ न कहे
बढ़ता चले
धुंधली उस मंज़िल की ओर
जहाँ रास्ता मुसाफ़िर और मंज़िल एक हो जाएं
और राह नहीं दिशा चुने
फिर हो दुर्गुम् दुष्कर रास्ते
पर उफ़ न कहे
बढ़ता चले
धुंधली उस मंज़िल की ओर
जहाँ रास्ता मुसाफ़िर और मंज़िल एक हो जाएं
- पुष्कर गुँजन, २०१५